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बादशाह से "इक्का" बड़ा होता है

तांश के खेलो में ज्यादातर महत्त्व बादशाह का होता है लेकिन कुछ खेल ऐसे है जिनमे बादशाह सिर्फ बादशाह ही रहता है अधिकार होते हुए भी वो अपने अधिकार के बिना रहता है
कुछ तांश के खेलो में बादशाह से ज्यादा इक्के का महत्त्व होता है , इस समय पर बादशाह कितना भी योग्य ,कितना भी होशियार हो , कितना भी इमानदार हो ,कितना भी बहादुर लेकिन उसे इक्के से कमजोर माना जाता है
और ऐसे में बादशाह को सिर्फ बादशाह ही कहा जाता है लेकिन वो चलता तो इक्के के इशारे पर ही है और इक्का चाहे जितना अयोग्य हो , असंस्कारित हो ,जिसे ये भी नही पता हो कि क्या सही है क्या सही नही, लेकिन वो अपनी धूर्तता और ताकत के कारण एक योग्य बादशाह को अपनी उँगलियों पर नचाता है उस में देश को सिर्फ हानी के अलावा कुछ नही मिलता है
आज मेरे देश में भी कुछ ऐसा ही है हमारा बादशाह इक्के की पकड़ में कुछ इस तरह फंसा है की वो चाह कर भी कोई निरणय नही ले पाता है यदि कोई बात आती हे तो वो अपने से पहले अपने इक्के से पूछता की हुजुर क्या करना है , फिर इक्का जो बिना योग्यता , और बिना किसी संस्कार वाला है जिसे ये भी नही पाता हे की कोन सा निरणय देश के हित में है और कोन सा निर्णय देश के हित में नही है उस योग्य बादशाह को गलत निर्णय लेने को मज्ब्बूर करता है और बादशाह मुट्ठी कस के ही न चाहने वाले निर्णय को लेने को मजबूर हो जाता है
आज भारत में कई ऐसी समस्या है जिन पर तुरंत ही निर्णय की आवश्यकता है यदि ज्यादा विलम्ब हुआ तो देश को बहुत बड़ी होनी हो सकती है जिसका भुगतान करना किसी भी मां के लाल की ताकत नही है की उसे वापस उसी स्थिति में ला सके ,
यदि हम अतीत की बात करें तो हम हम पहले ही कुछ ऐसे भूल कर चुके है जिनका भुगतान आज कर रहे हैं ,हम पहले ही बहुत बड़ा हिस्सा चीन को दे चुके है और आज भी हम पूरी तरह उस समस्या को लेकर जगे नही है क्यों कि चीन फिर से दावा कर रहा है कि अरुणाचल प्रदेश चीन का हिस्सा है लेकिन हमारी और से किसी प्रतिक्रिया का न होना ये एक बहुत बड़ी चिंता का विषय है
दूसरी और कश्मीर में अलगाव वाद को इतना बढावा मिलना कि अलगाववादीऔर दिल्ली में आ के सेमिनार करते हैं और भारत के संविधान को गाली देते है और तिरंगे को फाड़ने के लिए युवाओ को प्रोत्साहन देते है और ऐसे में हम और हमारी सरकार चुपचाप मूक दर्शक बन के देखते रहे हैं कुछ नही बोले ये भी वास्तव में एक चिंतनीय विषय है
आखिर हमारी क्या मजबूरी है ?/????
आपने आप को जो एक बहुत बड़ी मानवता वादी कहने वाली अरुंधती जो मन में आया वो बोलने लगती है जिन मुद्दों से सिर्फ भारत को हानी हुई है जैसे नक्सलिस्म, अलगाववाद के मुद्दों पर खुलकर भारत विरोधी भाषा को बोलना ,
मुझे नही लगता है ये कोई आज़ादी है और इस पर हमारी सरकार को कढ़ी प्रतिक्रिया करते हुए उन पर दंडात्मक कार्यवाही करनी चाहिए , यदि इन लोगो पर कार्यवाही नही हुई तो देश इन लोगो को देख कर कई गिलानी और अरुंधती राय भी पैदा हो सकती है
वैसे तो प्रधानमंत्री के लिए राष्ट्र धर्म सर्वोपरि होता है और यदि कोई मजबूरी भी हो तो भी हमे देश के बारे में पहले सोचना होगा उसके बाद अपनी मजबूरी के बारे , क्यों कि जब देश होगा तो हम अपनी मज्बोरियों के बारे में सोच पाएंगे , अन्यथा तो कोई बात ही नही ,,,,,,,,,,,
हमारी सरकार की तरफ से प्रतिक्रिया का न होना ये भी एक बहुत बड़ी चिंता का विषय है ,सरकार को इन राष्ट्र विरोधी ताकतों पर लगाम लगनी ही होगी,
जैसा कि कहा जाता है कि युवा देश का भविष्य होते हैं और शिक्षित युवा ही एक राष्ट को नई दिशा और दशा में ला सकते हैं उस पर न विचार करते हुए दिनों दिन फीस में बढ़ोत्तरी जिसका परिणाम आज ये है कि ज्यादातर युआ जो एक सामान्य परिवार से आते हैं वो या तो पढाई से दूर होते जा रही या फिर उनके माता पिता सिर्फ उन्हें साक्षर बनाने के लिए सामान्य डिग्री करवा के अपने फ़र्ज़ की अदायगी समझते हैं चाहे उन में कितनी भी प्रतिभा हो
अभी कुछ समय पहले सुनने में आया था कि फीस में कोई कमी नही कि जाएगी , यदि कोई पढ़ना चाहता है तो उसे सरकार कि तरफ से लोन दिया जायेगा , अब फिर से एक नया सवाल आता है दिमाग में कि सरकार का क्या ratio है नयी नौकरियों और पढ़े हुए युवाओ का ??
जैसा मैंने कई बार देखा है और अख़बारों में पढ़ा है कि किसी ब्यक्ति ने किसी कारण से लोन नही दे पाया तो उसके घर कुछ बैंक वाले आते हैं पहले तो गाली गलोज किया फिर उससे ब्यक्ति से कहते हैं यदि लोन नही दिया तो समझ लेना , और दुसरे उसी न्यूज़ पेपर में देखने को मिलता है उस ब्यक्ति ने आत्महत्या कर ली ,
क्यों कि कुछ कारण वश वो ब्यक्ति लोन नही दे पायाजब रतियो देखा जाता है तो कुछ ऐसे ही परिणाम निकल के आयेंगे
क्यों कि जॉब मिलाना आज के समय में बहुत बड़ी समस्या है
http://www.indiaonestop.com/unemployment.htm यदि इस तरह दिनों दिन फीस बढाती गयी तो फिर आज सामान्य प्रतिभावान छात्र पढ़ ही नही पायेगा , इस समय एक सवाल निकल के आता है कि क्या शिक्षा सिर्फ अमीरों के लिए हो के रह जाएगी ??
और क्या भारत दो हिस्सों में बट जायेगा अमीर भारत और दूसरा भारत गरीब भारत ???
बादशाह और इक्के का खेल सिर्फ तांश में ही अच्छा लगता है , न कि किसी देश के निरणय में , और नही किसी देश के भविष्य में ,
इसलिए अब हमे मुख्य समस्याओं के और अपना और अपनी सरकार का ध्यान दिलाना होगा
हमे अपने देश के हर निरणय पर अपनी प्रतिक्रिया और सुझाव देने होंगे , क्यों कि हम सब ही नए भारत का भविष्य है
दिब्यांग देव
शर्मा
surkiyan,,,,,,
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Oct 28, 08:33 pm
http://in.jagran.yahoo.com/news/international/politics/3_6_6857105.html
चीन ने भारतीय सीमा के नजदीक किया सैन्य अभ्यास
Oct 27, 11:57 pm
http://in.jagran.yahoo.com/news/international/politics/3_6_6855535.html
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Oct 23, 03:30 pm
http://in.jagran.yahoo.com/news/international/politics/3_6_6840532.html
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Oct 19, 11:47 am
http://in.jagran.yahoo.com/news/international/politics/3_6_6827233.html

टिप्पणियाँ

  1. एक अच्छा प्रयास... सामायिक घटना चक्र पर सारगर्भित चिंतन सतत होते रहना चाहिए.

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  2. Its very nice, jaisa aap sochte h sb waisa nhi sochte thats the problem of our countary, anyways this blog is very nice n touchy, i hope k k jaisa apne socha h is blog k through wo sb reality mein ho jaye, best of luck dear

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  3. so nyc k aap india k liye itna schte h....
    nd dats y its so touchy........

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  4. ये बात बिल्कुल सही है कि आज दुनिया के सबसे बरे लोकतांत्रिक देश में सही मायने में लोकतंत्र नहीं है.हमारे चुने हुए नेता सिर्फ अपनी जेब भरते है उन्हें गरीब जनता से कोई लेना-देना नहीं होता.इस स्थति में बाकि राष्ट्र विरोधी ,असमाजिक तत्व तो आपना सर उठायेगे ही न?

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  5. i am appreciating your thought.plze keep it on .because is a burning issue in our country.and i also faced these types of circumstances with me .


    Ajay singh
    HR Gwalior
    (9826213193)

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