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 नमस्कार मेरे भाइयों  और मेरे साथीगण मेरे प्रिय पाठकगण  बहुत दिन से मेरा ब्लॉग पेज निष्क्रिय था  जिस कारण से आप सभी से संवांद का कार्यक्रम बंद सा हो गया था ,  लेकिन  आज पुनः अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम जी जयंती के अवसर पर फिर से संवाद का कार्यक्रम स्थापित  किया है, फिर से हम नयी ऊर्जा और जोश के साथ सवांद   के कार्यक्रम को करने वाले हैं,और इस कार्य में आप मेरा सहयोग करेंगे ऐसे आशा हैा
धन्यवाद
दिब्यांग देव शर्मा

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लोग क्या कहेंगे ?

लाइफ एक रेस है तेज नही भागोगे तो कोई तुम्हे कुचल के आगे निकल जायेगा " 3idiot आज के इस प्रतियोगी युग में हर ब्यक्ति यही सोचता है और आगे बिना सोचे समझे , बिना चाहे , या चाहे दोड़ता जा रहा है ! हर कोई नम्बर के पीछे भाग रहा , कोई कम नंबर आने पर रो रहा है , कोई कुर्सी पर अपना नंबर लगा रहा है ऐसा लगता है कि दुनिया बस नंबर के लिए ही बनी है आज के परिवेश में हर तरफ नंबर की मारामारी है मैं एक सामान्य परिवार से हूँ और में पढ़ा लिखा हूँ लेकिन कुछ मजबूरियों और परिस्थितियों के कारण में अपना अध्ययन आगे नही बड़ा सका , मेरा सपना था कि में एक डॉक्टर बनू लेकिन में नही बन पाया , आज में चाहता हूँ कि मेरा बच्चा डॉक्टर बने , अब ये जरुरी नही कि बच्चा डॉक्टर बनाना चाहता है कि नही , ये तो सिर्फ उदहारण(example ) है ज्यादातर माता पिता कुछ इस तरह ही सोचते हैं कि उनका लड़का या लड़की जो वो नही कर पाए वो करे या उनके पडोसी या फिर रिश्तेदार जैसा बने ! बहुत कम माँ बाप अपने बच्चों के के पसंदीदा विषय के बारे में पूछते है नहीं वो लोग कभी उनकी रुचियों (hobbies)और शौक के बारे में गौर करते है नही सोचत...

एक गुलाब की कहानी

ये कहानी उस (गुलाब)पेड़ की है जो एक ऐसे बगीचे में पैदा हुआ जंहा पर अलग अलग प्रकार के पोधे लगे हुए थे ,जब छोटा था तब से जवानी तक वह पुरे बगीचे का आकर्षण बन के रहा ,और सभी को अपनी और आकर्षित करने की कोशिश करता ,इतराता रहता और बहुत ख़ुशी से उसका जीवन चल रहा था ,और नहीं कभी वह अपने बगल वाले पौधे की खबर लेता की उसके पास वाले पर क्या बीत रही है ,उस का तो सिर्फ इतना था की हवा मैं मस्त झूमते रहना , कुछ दिनों बाद जब उसमे कलियों का आना हुआ उसे अपने भविष्य की चिंता और कलियों की चिंता सताने लगी ;क्यों की कलियों को देख कर विभिन्न प्रकार की मक्खी , और कीट पतंगे और उन कलियों के पास आएँगी ,और जो आकर उसकी कलियों को छेड़ेंगे ,जबकि उसकी कलियाँ तो कुछ और ही सपना देखती होंगी ,जब वो जवान होंगी तो उन्हें कोई जवान सा भवर आकर छेड़ेगा और उनका रस पिएगा , उसे यह चिता इसलिए सताने लगी क्योंकि वह देखता रहता कि उसके वगल वाले पेड़ पर जब कलियाँ जवान होती तो पहले तो उसे वही मक्खी ,कीट और पतंगे छेडते, और कुछ और बड़ी हो ही पाती तो उन्हें माली आकर तोड़ ले जाता , फिर वह सोचने लगा कि जब कलियाँ और बड़ी होंगी तो उसकी कलियों को ...

बादशाह से "इक्का" बड़ा होता है

तांश के खेलो में ज्यादातर महत्त्व बादशाह का होता है लेकिन कुछ खेल ऐसे है जिनमे बादशाह सिर्फ बादशाह ही रहता है अधिकार होते हुए भी वो अपने अधिकार के बिना रहता है कुछ तांश के खेलो में बादशाह से ज्यादा इक्के का महत्त्व होता है , इस समय पर बादशाह कितना भी योग्य ,कितना भी होशियार हो , कितना भी इमानदार हो ,कितना भी बहादुर लेकिन उसे इक्के से कमजोर माना जाता है और ऐसे में बादशाह को सिर्फ बादशाह ही कहा जाता है लेकिन वो चलता तो इक्के के इशारे पर ही है और इक्का चाहे जितना अयोग्य हो , असंस्कारित हो ,जिसे ये भी नही पता हो कि क्या सही है क्या सही नही, लेकिन वो अपनी धूर्तता और ताकत के कारण एक योग्य बादशाह को अपनी उँगलियों पर नचाता है उस में देश को सिर्फ हानी के अलावा कुछ नही मिलता है आज मेरे देश में भी कुछ ऐसा ही है हमारा बादशाह इक्के की पकड़ में कुछ इस तरह फंसा है की वो चाह कर भी कोई निरणय नही ले पाता है यदि कोई बात आती हे तो वो अपने से पहले अपने इक्के से पूछता की हुजुर क्या करना है , फिर इक्का जो बिना योग्यता , और बिना किसी संस्कार वाला है जिसे ये...