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शनिवार, 31 दिसम्बर 2011

नव वर्ष नव संकल्प


नव वर्ष की शुभकामनाएं मेरे सभी मित्रों और मेरे visitors को , नए साल की शुरू आत पर हर व्यक्ति हर जीव और एक राष्ट्र में नयी ऊर्जा का संचार होता है और जब नयी ऊर्जा का संचार होता है ब्यक्ति कुछ नया करने का और नयी सोच और एक संकल्प का उदय होता है ,यदि ब्यक्ति की बात करें तो में ही वो ब्यक्ति हो सकता हूँ , तो में इस वर्ष ज्यादा से ज्यादा ब्लॉग लिखने का प्रयास करूँगा और ज्यादा से ज्यादा प्रभावी और में जो लिखूंगा उस पर अमल करने का भी प्रयास करूँगा ,और यदि राष्ट्र की बात करें तो किसी देश का भला तभी हो सकता है जब उसके नागरिको को संकल्प लेना चाहिए कि जो भूले , गलतियाँ हुई है , वो इस आने वाले समय में वो न हों ,२०११ को देखा जाय तो पूरी तरह भ्रष्टाचार वर्ष के रूप में देखा जाये तो कोई अतिश्योक्ति नही होगी क्यूँ कि जब घोटालो कि खबर पता चलती तो ये लगता कि जैसे राजनीती के मैदान के खिलाडी एक दुसरे का रिकॉर्ड तोड़ रहे हों ,और एक दुसरे से कह रहे हों कि तुझे में बड़ा चोर बनने नही दूंगा ,,,,, चाहे वो commonwealth game घोटाला हो , 2g spectrum घोटाला हो ,करनाटक सरकार द्वारा हुआ घोटाला,या फिर बॉम्बे का आदर्श सोसाइटी घोटाला हो ,
इन घोटालो के कारन हमारी जाँच agencies का दुरपयोग देश लिए घातक है , शर्म की बात तब है जब इन घोटालो के खिलाफ आवाज उठाई जाती है , तो इन आवाज उठाने वालो को इस तरह से दबाया जाता है कि आगे से कोई दोबारा भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज ही नही उहाये ,लेकिन इन भ्रष्टाचारियों से में कहना चाहूँगा यदि नही संभले तो ये कदम रुकेंगे नही, क्यों कि संसद से जन संसद बड़ी है , और यदि भारत के नागरिक भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत जन लोकपाल कि मांग करती है तो सरकार की पहली जिम्मेदारी है की जो लोग इन गतिविधियों में लिप्त है उन्हें कारावास तक भेजे और एक मजबूत लोकपाल बिल लाये ,
और दूसरी और कुछ आतंकवादी गतिविधियाँ जो की न्याय के मंदिर तक पहुँच चुकी है , ये इस नए वर्ष में न हों ,
इस नए वर्ष पर एक सकल्प लें की हम भ्रष्टाचार और आतंकवाद मुक्त भारत बनायेंगे ,,,,,,
वन्दे मातरम
दिब्यांग देव शर्मा

मंगलवार, 11 जनवरी 2011

लोग क्या कहेंगे ?

लाइफ एक रेस है तेज नही भागोगे तो कोई तुम्हे कुचल के आगे निकल जायेगा " 3idiot
आज के इस प्रतियोगी युग में हर ब्यक्ति यही सोचता है और आगे बिना सोचे समझे , बिना चाहे , या चाहे दोड़ता जा रहा है ! हर कोई नम्बर के पीछे भाग रहा , कोई कम नंबर आने पर रो रहा है , कोई कुर्सी पर अपना नंबर लगा रहा है ऐसा लगता है कि दुनिया बस नंबर के लिए ही बनी है
आज के परिवेश में हर तरफ नंबर की मारामारी है
मैं एक सामान्य परिवार से हूँ और में पढ़ा लिखा हूँ लेकिन कुछ मजबूरियों और परिस्थितियों के कारण में अपना अध्ययन आगे नही बड़ा सका , मेरा सपना था कि में एक डॉक्टर बनू लेकिन में नही बन पाया , आज में चाहता हूँ कि मेरा बच्चा डॉक्टर बने , अब ये जरुरी नही कि बच्चा डॉक्टर बनाना चाहता है कि नही ,
ये तो सिर्फ उदहारण(example ) है
ज्यादातर माता पिता कुछ इस तरह ही सोचते हैं कि उनका लड़का या लड़की जो वो नही कर पाए वो करे या उनके पडोसी या फिर रिश्तेदार जैसा बने !
बहुत कम माँ बाप अपने बच्चों के के पसंदीदा विषय के बारे में पूछते है नहीं वो लोग कभी उनकी रुचियों (hobbies)और शौक के बारे में गौर करते है नही सोचते हैं
और अपनी मर्जी को बिना सोचे समझे उसके ऊपर थोप देते हैं
और वो अबोध न चाहते हुए भी वो करता है जिस के बारे में कभी उसने कभी नही सोचा था
और इस कारण उस बालक या बालिका जंहा होना था वंहा न होते हुए वो अनचाही जगह चला जाता है
वैसे ज्यादातर परिणाम नकारात्मक(negative) ही आते हैं
नकारात्मक में ज्यादातर छात्र असफल(unsuccessful) ही रहते हैं या अपने बारे हमेशा नकारात्मक ही सोचते रहते हैं
जब कोई छात्र असफल होता है तो उसे सबसे ज्यादा डर(feared) लगता है
उसका पडोसी (neighbor)क्या कहेगा ?
या फिर उसका रिश्तेदार(relative) क्या कहेगा ?
उसका दोस्त (friend or classmate)क्या कहेगा ?
या फिर उसके पिता जी क्या कहेंगे ?
या फिर वो अपने घर और रिश्तेदारों के सामने मुह कैसे दिखायेगा ?और वो उस गलत रास्ते(wrong way) पर चला जाता है जिसके बारे मैं किसी युवक को जाने की सोचना भी नही चाहिए
यदि अभिभावक(parents) अपने बच्चे की रूचि या फिर उसके शौक पर थोडा ध्यान दें और बालक या बालिका की रूचि के अनुसार उसे उसी क्षेत्र में भेज दें, तो हो सकता है कि जिस बुलंदी से आप प्रभावित है आप के घर में उस बुलंदी से ऊपर ही कुछ हो
क्यूँ कि विश्वनाथन आनंद जब छोटा था तो उसकी मां ने उसके शौक को देखा और ६ साल कि उम्र से ही उसे शतरंज खेलने को दी आज विश्वनाथन आनंद विश्व में नंबर १ है

अब मेरा कहना उन मेरे भाइयों से है ये समाज है कुछ न कुछ कहेगा ही यदि आप अच्छा करते है तो ये आपको आँखों में बिठा लेगा और यदि आप कंही असफल होते हैं तो कुछ न कुछ कह्गा , लेकिन हमे उनकी बातो पर नही जाना चाइए और आगे प्रयास करना चाहिए
महान कवि मैथलीशरण गुप्त ने कहा की
" नर हो न निराश करो मन को "

आज दुनिया में कई उदाहरण हैं यदि वो भी असफल हो के या परिस्थित के सामने हथियार डाल देते तो आज वो सफल के शिखर पर नही होते , लेकिन उन्होंने हर हर परिस्थिति का सामना किया और आज उनका सफलता झुक कर सलाम कराती है जैसे की कालिदास , तुलसीदास . सचिन तेंदुलकर , धीरुभाई अम्बानी . Bill Gates ,Steave jobs ,
कभी हम एक या दो प्रयास में सोचते है अब मेरे से ये हो नही सकता है सबसे पहले बल्ब का अविष्कार थोमस अल्वा एडिसन ने किया उस बल्ब की कहानी की पीछे एक सार निकल के आता है कि हमे बस अपने सजग प्रयास बार -करते ही रहने चाहिए
क्यों कि
"कोशिश करने वालों की की कभी हार नही होती "
जिंदगी में ये बिलकुल भी जरुरी नही की हमे सफलता एक या दो बार में मिल जाये इसलिए लगातार इसके लिए प्रयास करने वाले ही उन ऊँचाइयों को पाते है जो इन दो बातो में विश्वास करते हैं मेरे अनुसार - कठिन परिश्रम होश के साथ ,दुबारा प्रयास ,(hard-work with awareness and try again )
हो सकता है हम भी इस पूरी दुनिया को अपने परिश्रम से दुनिया को नयी रोशनी और नयी किरण देने आए हों
वन्देमातरम
दिब्यांग देव शर्मा
ग्वालियर
भारत
आप इस लेख कोhttp://www.letsolve2gether.com पर देख सकते हैं

शुक्रवार, 29 अक्तूबर 2010

बादशाह से "इक्का" बड़ा होता है

तांश के खेलो में ज्यादातर महत्त्व बादशाह का होता है लेकिन कुछ खेल ऐसे है जिनमे बादशाह सिर्फ बादशाह ही रहता है अधिकार होते हुए भी वो अपने अधिकार के बिना रहता है
कुछ तांश के खेलो में बादशाह से ज्यादा इक्के का महत्त्व होता है , इस समय पर बादशाह कितना भी योग्य ,कितना भी होशियार हो , कितना भी इमानदार हो ,कितना भी बहादुर लेकिन उसे इक्के से कमजोर माना जाता है
और ऐसे में बादशाह को सिर्फ बादशाह ही कहा जाता है लेकिन वो चलता तो इक्के के इशारे पर ही है और इक्का चाहे जितना अयोग्य हो , असंस्कारित हो ,जिसे ये भी नही पता हो कि क्या सही है क्या सही नही, लेकिन वो अपनी धूर्तता और ताकत के कारण एक योग्य बादशाह को अपनी उँगलियों पर नचाता है उस में देश को सिर्फ हानी के अलावा कुछ नही मिलता है
आज मेरे देश में भी कुछ ऐसा ही है हमारा बादशाह इक्के की पकड़ में कुछ इस तरह फंसा है की वो चाह कर भी कोई निरणय नही ले पाता है यदि कोई बात आती हे तो वो अपने से पहले अपने इक्के से पूछता की हुजुर क्या करना है , फिर इक्का जो बिना योग्यता , और बिना किसी संस्कार वाला है जिसे ये भी नही पाता हे की कोन सा निरणय देश के हित में है और कोन सा निर्णय देश के हित में नही है उस योग्य बादशाह को गलत निर्णय लेने को मज्ब्बूर करता है और बादशाह मुट्ठी कस के ही न चाहने वाले निर्णय को लेने को मजबूर हो जाता है
आज भारत में कई ऐसी समस्या है जिन पर तुरंत ही निर्णय की आवश्यकता है यदि ज्यादा विलम्ब हुआ तो देश को बहुत बड़ी होनी हो सकती है जिसका भुगतान करना किसी भी मां के लाल की ताकत नही है की उसे वापस उसी स्थिति में ला सके ,
यदि हम अतीत की बात करें तो हम हम पहले ही कुछ ऐसे भूल कर चुके है जिनका भुगतान आज कर रहे हैं ,हम पहले ही बहुत बड़ा हिस्सा चीन को दे चुके है और आज भी हम पूरी तरह उस समस्या को लेकर जगे नही है क्यों कि चीन फिर से दावा कर रहा है कि अरुणाचल प्रदेश चीन का हिस्सा है लेकिन हमारी और से किसी प्रतिक्रिया का न होना ये एक बहुत बड़ी चिंता का विषय है
दूसरी और कश्मीर में अलगाव वाद को इतना बढावा मिलना कि अलगाववादीऔर दिल्ली में आ के सेमिनार करते हैं और भारत के संविधान को गाली देते है और तिरंगे को फाड़ने के लिए युवाओ को प्रोत्साहन देते है और ऐसे में हम और हमारी सरकार चुपचाप मूक दर्शक बन के देखते रहे हैं कुछ नही बोले ये भी वास्तव में एक चिंतनीय विषय है
आखिर हमारी क्या मजबूरी है ?/????
आपने आप को जो एक बहुत बड़ी मानवता वादी कहने वाली अरुंधती जो मन में आया वो बोलने लगती है जिन मुद्दों से सिर्फ भारत को हानी हुई है जैसे नक्सलिस्म, अलगाववाद के मुद्दों पर खुलकर भारत विरोधी भाषा को बोलना ,
मुझे नही लगता है ये कोई आज़ादी है और इस पर हमारी सरकार को कढ़ी प्रतिक्रिया करते हुए उन पर दंडात्मक कार्यवाही करनी चाहिए , यदि इन लोगो पर कार्यवाही नही हुई तो देश इन लोगो को देख कर कई गिलानी और अरुंधती राय भी पैदा हो सकती है
वैसे तो प्रधानमंत्री के लिए राष्ट्र धर्म सर्वोपरि होता है और यदि कोई मजबूरी भी हो तो भी हमे देश के बारे में पहले सोचना होगा उसके बाद अपनी मजबूरी के बारे , क्यों कि जब देश होगा तो हम अपनी मज्बोरियों के बारे में सोच पाएंगे , अन्यथा तो कोई बात ही नही ,,,,,,,,,,,
हमारी सरकार की तरफ से प्रतिक्रिया का न होना ये भी एक बहुत बड़ी चिंता का विषय है ,सरकार को इन राष्ट्र विरोधी ताकतों पर लगाम लगनी ही होगी,
जैसा कि कहा जाता है कि युवा देश का भविष्य होते हैं और शिक्षित युवा ही एक राष्ट को नई दिशा और दशा में ला सकते हैं उस पर न विचार करते हुए दिनों दिन फीस में बढ़ोत्तरी जिसका परिणाम आज ये है कि ज्यादातर युआ जो एक सामान्य परिवार से आते हैं वो या तो पढाई से दूर होते जा रही या फिर उनके माता पिता सिर्फ उन्हें साक्षर बनाने के लिए सामान्य डिग्री करवा के अपने फ़र्ज़ की अदायगी समझते हैं चाहे उन में कितनी भी प्रतिभा हो
अभी कुछ समय पहले सुनने में आया था कि फीस में कोई कमी नही कि जाएगी , यदि कोई पढ़ना चाहता है तो उसे सरकार कि तरफ से लोन दिया जायेगा , अब फिर से एक नया सवाल आता है दिमाग में कि सरकार का क्या ratio है नयी नौकरियों और पढ़े हुए युवाओ का ??
जैसा मैंने कई बार देखा है और अख़बारों में पढ़ा है कि किसी ब्यक्ति ने किसी कारण से लोन नही दे पाया तो उसके घर कुछ बैंक वाले आते हैं पहले तो गाली गलोज किया फिर उससे ब्यक्ति से कहते हैं यदि लोन नही दिया तो समझ लेना , और दुसरे उसी न्यूज़ पेपर में देखने को मिलता है उस ब्यक्ति ने आत्महत्या कर ली ,
क्यों कि कुछ कारण वश वो ब्यक्ति लोन नही दे पायाजब रतियो देखा जाता है तो कुछ ऐसे ही परिणाम निकल के आयेंगे
क्यों कि जॉब मिलाना आज के समय में बहुत बड़ी समस्या है
http://www.indiaonestop.com/unemployment.htm यदि इस तरह दिनों दिन फीस बढाती गयी तो फिर आज सामान्य प्रतिभावान छात्र पढ़ ही नही पायेगा , इस समय एक सवाल निकल के आता है कि क्या शिक्षा सिर्फ अमीरों के लिए हो के रह जाएगी ??
और क्या भारत दो हिस्सों में बट जायेगा अमीर भारत और दूसरा भारत गरीब भारत ???
बादशाह और इक्के का खेल सिर्फ तांश में ही अच्छा लगता है , न कि किसी देश के निरणय में , और नही किसी देश के भविष्य में ,
इसलिए अब हमे मुख्य समस्याओं के और अपना और अपनी सरकार का ध्यान दिलाना होगा
हमे अपने देश के हर निरणय पर अपनी प्रतिक्रिया और सुझाव देने होंगे , क्यों कि हम सब ही नए भारत का भविष्य है
दिब्यांग देव
शर्मा
surkiyan,,,,,,
जेएंडके की आजादी के बिना पाक की आजादी अधूरी
Oct 28, 08:33 pm
http://in.jagran.yahoo.com/news/international/politics/3_6_6857105.html
चीन ने भारतीय सीमा के नजदीक किया सैन्य अभ्यास
Oct 27, 11:57 pm
http://in.jagran.yahoo.com/news/international/politics/3_6_6855535.html
चीन ने मैप में अरूणाचल को अपना बताया
Oct 23, 03:30 pm
http://in.jagran.yahoo.com/news/international/politics/3_6_6840532.html
प्रतिभा है तो अमेरिका में मिल सकती है तरक्की
Oct 19, 11:47 am
http://in.jagran.yahoo.com/news/international/politics/3_6_6827233.html

शनिवार, 30 जनवरी 2010

एक गुलाब की कहानी

ये कहानी उस (गुलाब)पेड़ की है जो एक ऐसे बगीचे में पैदा हुआ जंहा पर अलग अलग प्रकार के पोधे लगे हुए थे ,जब छोटा था तब से जवानी तक वह पुरे बगीचे का आकर्षण बन के रहा ,और सभी को अपनी और आकर्षित करने की कोशिश करता ,इतराता रहता और बहुत ख़ुशी से उसका जीवन चल रहा था ,और नहीं कभी वह अपने बगल वाले पौधे की खबर लेता की उसके पास वाले पर क्या बीत रही है ,उस का तो सिर्फ इतना था की हवा मैं मस्त झूमते रहना ,

कुछ दिनों बाद जब उसमे कलियों का आना हुआ उसे अपने भविष्य की चिंता और कलियों की चिंता सताने लगी ;क्यों की कलियों को देख कर विभिन्न प्रकार की मक्खी , और कीट पतंगे और उन कलियों के पास आएँगी ,और जो आकर उसकी कलियों को छेड़ेंगे ,जबकि उसकी कलियाँ तो कुछ और ही सपना देखती होंगी ,जब वो जवान होंगी तो उन्हें कोई जवान सा भवर आकर छेड़ेगा और उनका रस पिएगा ,

उसे यह चिता इसलिए सताने लगी क्योंकि वह देखता रहता कि उसके वगल वाले पेड़ पर जब कलियाँ जवान होती तो पहले तो उसे वही मक्खी ,कीट और पतंगे छेडते, और कुछ और बड़ी हो ही पाती तो उन्हें माली आकर तोड़ ले जाता ,

फिर वह सोचने लगा कि जब कलियाँ और बड़ी होंगी तो उसकी कलियों को भी माली तोड़ के ले जायेगा ,और पता नहीं उसकी कली का क्या होगा

क्या उसकी कली किसी मदिर पर चढाई जाएगी ,

या किसी कलियों के ब्यापारी के हाथ मैं चली जाएगी

या फिर किसी ऐसे दरिन्दे के हाथ जाएगी जो सिर्फ उसका रस निकाल कर उसे फ़ेंक देगा कि फिर उसकी कली की फिर कोई पूछ नहीं होगी,

या फिर उसकी कली किसी गोरी कि सोभा बढाएगी

या फिर किसे योग्य वर द्वारा उनका स्वयं वर होगा ,

यह सोच कर पोधा इसलिए परेशान था क्यों कि जब उससे बड़े पोधओं के कली आई थी तब उनकी कलियों को वो बचा नहीं पाया था उस माली से , और नहीं उसने कोशिश , नहीं तो आज वो बगीचा पुरे फूलों और कलियों से भरा होता और हर पेड़ फूलो और खुशियों से बना रहता ,

ये बात तो सिर्फ एक पेड़ कि है , लेकिन यही बात जब एक पिता तब सोचता है जब उसकी घर कि kalee बड़ी होने लगाती है तो भारत के परिद्रश्य को देख कर घबराता है क्यों की आज भारत मैं कंही कोई भी बेटी सुरखित नहीं है क्यों की हम पडोसी के बारे मैं नहीं पूछते की उसके साथ क्या चल रहा है यदि हम एसा सोचते तो मुझे नहीं लगता की यंहा भी जो सुर्ख़ियों मैं है वो होता , लेकिन हमे सोचना ही होगाकी kya हम इतने गिर गए है की क्या सामाजिक है क्या सामाजिक नहीं है सोचना ही होगा और हमे पता है की हम एक सबसे सभ्य देश के नाग रिक हैं हम कुछ ऐसा करेंगे तो any देशो का क्या होगा ??????????????????

क्योंकि ये सुर्खियाँ kuch kahati कहती हैं
(बाल वेश्यावृत्ति का केंद्र बन रहा है )

भारतJan 29, 08:07 pmबताएं नई दिल्ली। सुप्रीमकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि भारत तेजी से बाल वेश्यावृत्ति गिरोह का केंद्र बनता जा रहा है और उसने इस समस्या से निपटने के लिए विशेष जांच एजेंसी गठित करने का सुझाव दिया। न्यायमूर्ति दलबीर भंडारी और न्यायमूर्ति ए के पटनायक ने सालीसीटर जनरल गोपाल सुब्रह्मण्यम से बाल वेश्यावृत्ति गिरोह से निपटने के लिए विशेष जांच एजेंसी गठित करने के विचार का परीक्षण करने को कहा। साथ ही आश्वस्त किया कि सेक्स के कारोबार में बच्चों को लगाने वालों को कोर्ट जमानत नहीं देगी। शीर्ष कोर्ट ने बचपन बचाओ आंदोलन द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि ऐसा हो रहा है क्योंकि देश में व्यापक गरीबी है। यह देश में भारी पैमाने पर बेरोजगारी के कारण भी हो रहा है। हमारे सभी सांस्कृतिक लोकाचार नाले में जा रहे हैं। यह इस तरह की गतिविधियों का केंद्र बन रहा है। शीर्ष कोर्ट ने जानना चाहा कि सरकार क्यों नहीं उन लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 [दुष्कर्म] लगा रही है जो इस तरह के वेश्यावृत्ति गिरोह में बच्चों का शोषण कर रहे हैं। शीर्ष कोर्ट ने पूछा कि ज्यादातर यौनकर्मी बच्चे हैं। क्यों नहीं आप उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 376 लगा रहे हैं। अगर आप दस मामलों में ऐसा करेंगे तो वे ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएंगे। कोर्ट उन्हें जमानत भी नहीं देंगी।

2 दुष्कर्म केस का मुख्य आरोपी अनिल व अमन गिरफ्तार

महिलाओं का नक्सली कमांडरों पर दुष्कर्म का आरोंप

4सेक्स टूरिज्म की छवि से गोवा सरकार परेशानJan 31, 11:13 ऍम

5राठौड़ की पेंशन में कटौती की तैयारी Jan 29, 04:22 pm

सरकार रुचिका छेड़छाड़ मामले के दोषी हरियाणा के पूर्व डीजीपी एस। पी. एस. राठौड़ की पेंशन कटौती की प्रक्रिया शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

६ राजधानी एक्सप्रेस में छेड़छाड़ पर हंगामा Jan 26, 11:26 प.म
७ बिहार: दुष्कर्म के आरोपी को जिंदा जलाया
8सुप्रीम कोर्ट में जेसिका लाल हत्याकांड की सुनवाई शुरू Jan 19, 11:22 पम
9 विधायक पर नौकरानी के उत्पीड़न का केस Jan 10, 03:06 pm
क्या यही है भारत,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,??????????









शनिवार, 21 नवम्बर 2009

kya hum shixit hai ?

aaj jab main un logon ko dekhata hun, jo apane aap ko padha likha or ek advance genration ke roop me mante hai ,or kahate hai ki we are highly educated ,
or jab in highly educated ko wo karate dekhata hun jo ek educated ko nahi karana chahiye , pata nhi ye kis tarah ke advance hain ?
1- ek cigarette ke packet par likh rahata hai, cigarette is injurious to the health , ya phir cigarette se cancer ho sakata hai , lekin phir bade shauk se pite hai ,

2- dusara ye dekha ki jo log sharab pite hai wo swyam hi kahate hai ki sharab main koi swad hi nahi hota wo to sirf kadwi hoti hai , or sharab ki har bottel par likha rahata ki sharab pina swasthy(health) ke liye hanikarak hai ,or isase sabase pahale sharir ka sabase mahtwapurn organ liver affected hota hai , lekin jo padha likha tabaka hai , wo is sharab ko aapana shouk manata hai , or aaj kal dekha hai ki jo byakti in cheejo se door hai use ye kah kar log chidate hai ki ye jindgi main kuch kar hi nahi payega , yani inka matalab hai ki sharab piyoge to hi kuch kar sakate ho anytha aapka jivan bekaar hai

3- sabse bada achambha to tab hota hai ki jab jab jo aaj kal ek chij hai pastry jo or shit pey (cold drink) jo hamesha hamare pachan tantra (digestive system) ka sabase badha dushaman hai ,or use aaj ki yuva pidhi (youth genrration )bade chav se pasand karati hai , or dusare tisare din hi kahate ki aaj pet kharab hai ya phir aaj pet main jalan padh rahi hai , or yesa bhi nahi ki in logon ko pata na ho ki pasrise khayebnge to bimar honge
4-aaj kal ke mata pita jo apane aap ko adavance to samajhate hai hi balki vo apane baccho ko bhi adavnce banana chahate wo bhi ek aise mithai khilakar jo hamesha hi sharir ko hani pahunchati hai usaka nam hai chocolate , jo bacche ko sirf 7-8 sal main hi buddha (old age person ) bana deti hai ,kyon ki jab baccha is chocolate ko khata hai to usake dant kam umar main kharab ho jate hain or wo budhha ho jata hai
ab us balak ki kya galati jo us nadan ko diya gaya

is tarah se apane aap ko educated ko bas yahi kahunga ki


kya aap manshik roop se gulam ban gaye kya
ya phir aap itane educated ho kar bhi bideshi copnay ki seva kar rahe ho jisame aap ka sharir hi prabhavit ho jaye
ya aap apani buddhi or vivek sabhi ko kho baithe hain
ya hum kya accha hai kya bura main antar kkarana bhul gaye hai


yadi aap sixit hain or aise gatividhi karate hia jo ek bina padha likha kabhi sapane main bi nahi kara sakata , yani jan bhujh kar jahar ko lena ye kanha ki siksha hai mere bhai


socho bharat bhavishya hame kise ka gulam nahi banana balki apani budh se duniya ka phir se guru banana hai


jago bharat bhvishya

dibyang dev sharma
gwalior
8982907227

बृहस्पतिवार, 3 सितम्बर 2009

हाय ये महगाई


आज जब एक आम आदमी के बारे मैं सोचता हूँ तो एक परेशानी व् चिंता से घिरा हुआ पता हूँ क्यों की एक ब्यक्ति जिसका रोजगार १००-१२५ रुपये है और उसके घर मैं सिर्फ़ चार सदस्य हैं (१ स्वयं ,१ बीबी २ बच्चे ) तो उसके खर्चे कैसे चलते होंगे ,क्योंकि आज कोई भी सब्जी १५-२० रुपये किलो से कम नही , और कोई भी दल ६०-९० केजी से कम नही ,और आटे का भावभी १६-१८ रुपये किलो से कम नही ,दूध भी २८-३० लीटर है यदि ऐसी स्थिति मैंएक आम आदमी खाए तो क्या खाए ,,यदि छोटी सी गड़ना करें तो हम पाएंगे की यदि एक ब्यक्ति एक दिन मैं ५०० ग्राम आता खाता है और लगभग ५०० ग्राम ही वो सब्जी भी खाता होगा , और घर मैं चार सदस्य हैं तो इस हिशाब से ८० रुपये सिर्फ़ उसके भोजन मैं ही खर्च हो रहें है ये तो सिर्फ़ भोजन है इसमे नही चाय है नही और अन्य नास्ता नही है
और उस व्यक्ति के बच्चे स्कूल जाते हों तो उनकी शिक्षा तोमुश्किल है क्यों की जरूरी नही वह व्यक्ति शाशन द्वारा दी गई विभिन्न कैटगरी मैं आता हो (),हम भारत मैं रहते हैं और हमारे यंहा सामूहिक परिवार की व्यवस्था है यदि एसी स्थिति मैं कंही उसके माता पिता उसके साथ रहते हैं
तो वह क्या करे क्या बच्चों को खिलाये क्या मां बाप को दे ,
यह भी जरूरी नही की उस व्यक्ति को रोजाना रोजगार मिले ।, क्यों की जो सरकारी योजना आती है वो सिर्फ़ कागजों मैं ही सही ढंग से चलती है वालिक सच्चाई कुछ और ही होती है ,
यदि उस व्यक्ति के परिबार के उन्य खर्चे जैसे कपडे , मकान , और अन्य सामान के बारे मैं सोचन एक बेमानी ही होगी
कोई कभी बीमार न हो यदि कंही कई उस परिवार का सदस्य बीमार पड़ा गया तो ,,,,,,,,यदि आम आदमी का (मजदूर) हाथ थम गया तो देश की क्या स्थित होगी इसके बारे मैं सोचन मुश्किल है ,
क्यों की एक देश के भविष्य मैं एक मजदूर का भी बहुत बड़ा योगदान होता है,

और उसके लिए भी उसकी चिंता करना होगी , अन्यथा हमारी हर व्यवस्था प्रभवित हो सकती हैं , मजदूर भी देश का भविष्य निर्माणक है
वन्देमातरम
दिब्यांग देव शर्मा
ग्वालियर

सोमवार, 31 अगस्त 2009

hindustan ke yuvaon ko chetavani

Aaj, hamare padosi mulk ,hamare hiteshi kam balki hamre kattar dushaman jarror bante jarahe hai , kyon ki ek bhi yesa din nahi jata hai jis din hum ye na sune ki aaj Hindustan ka din shukhad purn raha hai ,kyon ki rojana hi aaj vishpot , ya phir muthbhed ya phir koi yesa sthan janha kise padosi dwara ghera jana ,(lalgharh) jaise ki aasam ke kai tahsil, aaj bangladeshiyon ki girfat main aati ja rahi hain or kuch aa gayi hain ,or rojana nakali mudra(notes) ka bharat main aana vo ya to Bangladesh ke raste ya phir Nepal ke raste ,Aaj hamara padosi desh jisako hum kamajor sakjh baithe hain , kamjor nahi balki usaki mansha yah hai kaise bhi kar ke purv ke rajya , aasam , west bangal ,ko gher ke bharat vibhajan ki yojana main hai ,
yadi hum bat karen Pakistan ki to to hum abhi bomabay ke blast ki ghatana(26/11)ke din hamare kai jawan mare gaye , bhul nahi paye hain tab tak hal hi main phir se ghushpaith suru karane par hamare jawano ne jawab diya unhe , ab to aisa malum hota hai ki jo sadyantra sirf Bangladesh or Pakistan kar rahe the ,usase bada sadyantra aaj ek or desh rachane laga hai usaka nam hai China , jo abhi hal hi main china ke ek ran-neetikar ne kaha hai ki Bharat ko 20 se 30 tukadon main tod dena chahiye , or aise ran-neeti par kam bhi shuru kar diya hai kyon ki (जम्मू। चीन के दो हेलीकॉप्टर ने हाल ही में जम्मू कश्मीर के लेह इलाके में भारतीय वायुसीमा का उल्लंघन किया।
सूत्रों ने आज यहां बताया कि चीन के दो हेलीकॉप्टर लेह स्थित 14वीं कोर इलाके में घुस आए लेकिन सेना की उड्डयन कोर के चीता और चेतक हेलीकोप्टरों द्वारा पीछा किए जाने के बाद वे वापस चले गए।)Yah kartoot bata rahi hai ki ab China ne bhi najaren bharat ki or mod li hain , is samay hamari yuva pidi ki kya bhumika rahegi , or hamari govt ki kya bhumika rahegi , aisa kisi bhi ranneetikar ne is bare main nahi socha hoga ,
yadi hum yuva pidhi ki bat karen to abhi tak bahut se yuvaon ko pata hi nahi hoga ki aaj desh main kya chal raha hai , kyon ki khch to kam ke bojh se dabe rahate hain, kuch ko idhar udhar ki baton se fursat nahi , kuch is vichar dhara ke hain ki abhi to kashmir main hua hai hamare pas aayenge tab sochenge ,
lekin ab bharat ke yuvaon ko ek jan jagrati lani hogi ki aaj hume bhi taiyar rahana chahiye hum abhi ashuraxit hain , or yadi koi bat hoti hain to hume muh tod jabab dene ko taiyar rahana hoga , kyon ki yuva hi kise desh ki reedh hoten hain , or ye ek acchi bat hai ki sabse jyada yuva vishwa main hain to vo desh bhi bharat hai, ish liye hum sabhi yuvaon ko taiyar rahana hoga , kyon ki aaj aakela pak hi nahi balki Bhina or Bangladesh bhi hamari pragati ko nahi pacha pa rahe hai ,
jago bharat bhavishya
because we are future of our country
jai hind
dibyang dev